डीप डिप्रेशन ने दिघा के पास दी दस्तक — पूरे पूर्वी भारत में तबाही का खतरा
उत्तर-पश्चिम Bay of Bengal में बना डीप डिप्रेशन मंगलवार 28 जुलाई 2026 की तड़के रात 12:30 से 1:30 बजे IST के बीच पश्चिम बंगाल के प्रसिद्ध समुद्र तटीय शहर दिघा के निकट तट से टकराया। भारतीय मौसम विभाग (IMD) की सुबह 9:18 बजे जारी रिपोर्ट के अनुसार, यह मौसम प्रणाली सुबह 5:30 बजे IST पर उत्तरी तटीय ओडिशा और गंगीय पश्चिम बंगाल के ऊपर केंद्रित थी।
लैंडफॉल के समय यह सिस्टम दिघा (WB) से 30 किमी पश्चिम-उत्तरपश्चिम, बालासोर (ओडिशा) से 30 किमी उत्तर-पूर्व, बारीपदा (ओडिशा) से 50 किमी पूर्व-दक्षिणपूर्व, जमशेदपुर (झारखंड) से 160 किमी दक्षिणपूर्व और क्योंझरगढ़ (ओडिशा) से 170 किमी पूर्व में स्थित था।
IMD के मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि यह सिस्टम अगले 24 घंटों में उत्तरी ओडिशा, दक्षिणी झारखंड और उत्तरी छत्तीसगढ़ की ओर बढ़ता रहेगा। इसके प्रभाव से इन राज्यों में अत्यधिक भारी वर्षा, तेज आंधी (30–50 किमी/घंटा) और बिजली गिरने की संभावना है।
मध्य प्रदेश में एक मौसम विशेषज्ञ के अनुसार, यह सिस्टम झारखंड और छत्तीसगढ़ से होता हुआ मध्य भारत की ओर बढ़ेगा, जिससे 28 से 30 जुलाई के बीच मध्य प्रदेश में बहुत भारी या अत्यधिक भारी बारिश होने की संभावना है। मानसून 2026 की पूरी जानकारी यहाँ पढ़ें →
किन राज्यों में कौन सा अलर्ट? — राज्य-वार पूरी सूची
IMD ने 28 जुलाई 2026 को देश भर के विभिन्न राज्यों में अलग-अलग रंग के मौसम अलर्ट जारी किए हैं। रेड अलर्ट का अर्थ है "तुरंत कार्रवाई करें", ऑरेंज अलर्ट का अर्थ है "सतर्क रहें" और येलो अलर्ट का अर्थ है "नज़र रखें"।
| राज्य / क्षेत्र | अलर्ट स्तर | बारिश की संभावना | अवधि |
|---|---|---|---|
| ओडिशा (संबलपुर, बरगढ़, सुंदरगढ़, झारसुगुड़ा) | ऑरेंज | अत्यधिक भारी (≥21 सेमी) | 28 जुलाई |
| झारखंड | रेड | बहुत भारी से अत्यधिक भारी | 28–29 जुलाई |
| छत्तीसगढ़ | रेड | अत्यधिक भारी (≥21 सेमी) | 28–29 जुलाई |
| पश्चिम बंगाल | ऑरेंज | भारी से बहुत भारी | 28 जुलाई |
| मध्य प्रदेश (पूर्वी) | ऑरेंज | भारी से बहुत भारी | 29 जुलाई–3 अगस्त |
| मध्य प्रदेश (पश्चिमी) | येलो | बहुत भारी (≥11 सेमी) | 30 जुलाई |
| विदर्भ, महाराष्ट्र | ऑरेंज | बहुत भारी | 29–30 जुलाई |
| दिल्ली-NCR | ऑरेंज | भारी + तेज हवाएं | 28 जुलाई |
| पंजाब, हरियाणा | येलो | मध्यम से भारी | 28–30 जुलाई |
| हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड | ऑरेंज | व्यापक भारी वर्षा | 28 जुलाई–3 अगस्त |
| जम्मू-कश्मीर, लद्दाख | येलो | मध्यम से भारी | 28 जुलाई–3 अगस्त |
| गुजरात क्षेत्र | ऑरेंज | बहुत भारी (≥21 सेमी) | 31 जुलाई |
| बिहार, उत्तर प्रदेश | येलो | मध्यम से भारी | 28–30 जुलाई |
IMD मानसून ट्रफ इस समय बीकानेर, ग्वालियर, सतना, डाल्टनगंज से होते हुए उत्तरी तटीय ओडिशा पर केंद्रित डीप डिप्रेशन के केंद्र तक जा रही है। इसके ऊपर दक्षिण-पूर्व की ओर फैला कम दबाव का क्षेत्र मानसून को सक्रिय बनाए हुए है। मानसून 2026 की पूरी जानकारी यहाँ देखें →
दिल्ली-NCR में आज की बारिश — ऑरेंज अलर्ट जारी
मंगलवार को दिल्ली-NCR में घने बादलों के बीच जोरदार बारिश हुई, जिसने गर्मी और उमस से परेशान राजधानी को राहत दी। IANS की रिपोर्ट के अनुसार IMD के प्राथमिक मौसम स्टेशन सफदरजंग ने सुबह 8:30 बजे तक 32.4 मिमी बारिश दर्ज की।
दिल्ली में कर्तव्य पथ समेत कई इलाकों में लगातार बारिश रही। मौसम विशेषज्ञों ने बताया कि यह बारिश डीप डिप्रेशन के कारण उत्तर भारत में मानसून सक्रिय होने से हो रही है। पंजाब में शहीद भगत सिंह नगर, बठिंडा, लुधियाना, पठानकोट, होशियारपुर, जालंधर और मोहाली में भी बारिश दर्ज हुई। हरियाणा में भिवानी, करनाल, महेंद्रगढ़, सोनीपत और अंबाला में अच्छी बारिश हुई।
दिल्ली के मौसम का पूरा हाल यहाँ पढ़ें → | गुरुग्राम (Gurgaon) मौसम →
ISRO सैटेलाइट की नजर से भारत — INSAT-3DS ने दिखाई भयावह तस्वीर
🛰 ISRO INSAT-3DS — मौसम का अंतरिक्षीय प्रहरी
22 जुलाई 2026 को दोपहर 3:00 से 3:27 बजे IST के बीच ISRO के INSAT-3DS मौसम सैटेलाइट ने भारतीय उपमहाद्वीप पर घने बादलों की ऐसी तस्वीरें खींचीं जो बेहद डरावनी थीं — लगभग पूरा भारत घने मानसूनी बादलों से ढका हुआ दिखा।
Thermal Infrared Imagery में अरब सागर से लेकर ओडिशा-छत्तीसगढ़-मध्य प्रदेश से गुजरात तक बादलों की एक विशाल पट्टी दिखी। बादलों के शिखर की ठंडक और चमकीली सफेदी गहरे संवहनीय तूफानों का संकेत है, जो भारी से बहुत भारी वर्षा करा सकते हैं।
INSAT-3DS सैटेलाइट भू-स्थिर कक्षा (Geostationary Orbit) से पृथ्वी की सतह और महासागरों पर नज़र रखता है। यह INSAT-3D और INSAT-3DR का अगली पीढ़ी का मौसम सैटेलाइट है, जो मौसम पूर्वानुमान और आपदा चेतावनी में अहम भूमिका निभाता है।
ISRO की सैटेलाइट इमेजरी क्या बताती है?
📡 ताज़ा सैटेलाइट डेटा से मुख्य संकेत
- Arabian Sea System: महाराष्ट्र के कोंकण तट के समानांतर एक विशाल संवहनीय बादल प्रणाली फैली है, जो गर्म समुद्री सतह और तेज दक्षिण-पश्चिमी मानसूनी हवाओं से ऊर्जा ले रही है।
- Bay of Bengal System: उत्तरी Bay of Bengal के ऊपर एक और शक्तिशाली तूफान प्रणाली गंगीय पश्चिम बंगाल, बांग्लादेश और पूर्वोत्तर राज्यों तक फैली है।
- Central India Band: अरब सागर से ओडिशा तक बादलों की व्यापक पट्टी मध्य भारत को भिगो रही है।
- Cloud Top Temperature: बादलों के शिखर का तापमान बेहद नीचा है — यह गहरे गरज-तूफानों और भारी वर्षा का स्पष्ट संकेत है।
ISRO और IMD मिलकर इस डेटा का उपयोग करके जिला-स्तरीय अलर्ट तैयार करते हैं। सैटेलाइट डेटा के बिना इतने सटीक पूर्वानुमान संभव नहीं होते, जो लाखों लोगों की जान बचाते हैं।
कल (29 जुलाई 2026) का मौसम पूर्वानुमान — क्या है IMD का कहना?
IMD की 28 जुलाई 2026 की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, अगले 4–5 दिनों में उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत में मानसून वर्षा सामान्य से अधिक रहने की संभावना है। 29 जुलाई को निम्नलिखित स्थानों पर भारी बारिश अनुमानित है:
🗓 29 जुलाई 2026 — मौसम पूर्वानुमान
- छत्तीसगढ़: अत्यधिक भारी वर्षा (≥21 सेमी) — रेड अलर्ट
- पूर्वी मध्य प्रदेश: बहुत भारी वर्षा — ऑरेंज अलर्ट
- विदर्भ (महाराष्ट्र): भारी से बहुत भारी — ऑरेंज
- हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, J&K: व्यापक बारिश जारी
- झारखंड, बिहार: मध्यम से भारी बारिश
- दिल्ली-NCR: हल्की से मध्यम बारिश जारी रह सकती है
- उत्तर प्रदेश: पूर्वी व पश्चिमी दोनों हिस्सों में बारिश
IMD मौसम ट्रफ (Monsoon Trough) की स्थिति अगले कुछ दिनों तक इसी प्रकार बनी रहेगी। दक्षिण-पश्चिम राजस्थान के ऊपर एक ऊपरी वायुमंडलीय चक्रवाती परिसंचरण भी सक्रिय है, जो मानसून को और मजबूत बना रहा है।
28 जुलाई का मौसम यहाँ देखें → | बारिश कब होगी — पूरी जानकारी →
शहर-दर-शहर मौसम हाल — आज कहाँ क्या है स्थिति
28 जुलाई 2026 को देश के प्रमुख शहरों में मौसम की स्थिति नीचे देखें। अधिक जानकारी के लिए अपने शहर का लिंक क्लिक करें:
NISAR — भविष्य की आपदा चेतावनी का नया हथियार
भारतीय मौसम और आपदा प्रबंधन को एक नई ताकत मिली है — NISAR (NASA-ISRO Synthetic Aperture Radar) सैटेलाइट। यह $1.5 अरब डॉलर की लागत से बना दुनिया का पहला डुअल-फ्रीक्वेंसी रडार इमेजिंग सैटेलाइट है, जिसे भारत ने NASA के सहयोग से विकसित किया।
🌍 NISAR की खासियतें
NISAR सैटेलाइट दो रडार फ्रीक्वेंसी का उपयोग करता है — NASA का L-Band और ISRO का S-Band। यह 747 किमी की ऊँचाई पर Sun-Synchronous ऑर्बिट में है और हर 12 दिनों में 240 किमी चौड़ी रडार स्वाथ से पूरी पृथ्वी को मैप करता है।
NISAR पृथ्वी की सतह में 1 सेंटीमीटर तक के बदलाव को नाप सकता है। इससे हिमालय के ग्लेशियरों का पिघलना, भूस्खलन की संभावित जगहें, बाढ़ क्षेत्र और भूकंप जोन की पहचान होती है — जो भविष्य की बड़ी आपदाओं से पहले चेतावनी देने में मदद करेगा।
ISRO अध्यक्ष वी. नारायणन ने कहा था: "यह सैटेलाइट किसी एक या दो देश के लिए नहीं, पूरी दुनिया के काम आएगा।" मानसून मौसम में NISAR का डेटा बाढ़-संभावित इलाकों की अग्रिम पहचान में खासा उपयोगी साबित होगा।
किसानों के लिए IMD की विशेष सलाह
भारी मानसूनी बारिश के मद्देनजर IMD ने देश भर के किसानों के लिए महत्वपूर्ण सलाह जारी की है:
🌾 किसान भाइयों के लिए सलाह
- जम्मू-कश्मीर और पंजाब के किसान खरीफ दलहन (मूंग, उड़द) की बुवाई अभी न करें, मौसम सुधरने पर करें।
- धान, मक्का, सोयाबीन, अरहर और मूंगफली की फसलों में उचित जल निकासी सुनिश्चित करें।
- फल-बगीचों में जल-जमाव से बचने के लिए नालियाँ खुली रखें।
- भारी बारिश के दौरान खेत में काम न करें, बिजली गिरने का खतरा है।
- कम दबाव वाले क्षेत्रों (ओडिशा, झारखंड, छत्तीसगढ़) के किसान फसल सुरक्षित स्थान पर रखें।
- मछुआरे अगले 48 घंटे समुद्र में न जाएं — Bay of Bengal में ऊँची लहरें और तेज हवाएं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
📚 स्रोत एवं संदर्भ:
- • India Meteorological Department (IMD) — mausam.imd.gov.in — प्रेस विज्ञप्ति 28 जुलाई 2026
- • IMD All India Weather Report — सुबह 9:18 बजे IST, 28 जुलाई 2026
- • ISRO INSAT-3DS — isro.gov.in
- • IANS — Delhi-NCR Rain Report, 28 जुलाई 2026
- • Down To Earth — Deep Depression Landfall, 28 जुलाई 2026
- • Free Press Journal — MP Weather Update, 28 जुलाई 2026
- • Reuters — NISAR Satellite Launch Report
